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1 साल के बच्चे को खेल-खेल में सिखाएं ये 8 चीजें, पेरेंटिंग एक्सपर्ट मोनिका साहा की टिप्स से बढ़ेगी समझ और आत्मविश्वास

1 साल के बच्चे को खेल-खेल में सिखाएं ये 8 चीजें, पेरेंटिंग एक्सपर्ट मोनिका साहा की टिप्स से बढ़ेगी समझ और आत्मविश्वास

एक साल की उम्र बच्चे के विकास का सबसे नाजुक और रोचक दौर होता है — इसी उम्र में बच्चा दुनिया को पहचानना और उससे जुड़ना शुरू करता है। एनडीटीवी लाइफस्टाइल में 30 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में पेरेंटिंग एक्सपर्ट मोनिका साहा ने बताया है कि इस उम्र के बच्चों को खेल-खेल में 8 सिंपल चीजें सिखाई जा सकती हैं, जिनसे उनकी समझ, भाषा और आत्मविश्वास तीनों बढ़ते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक मोनिका साहा ने ये सुझाव अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में साझा किए हैं। हैदराबाद की मोनिका साहा पेरेंटिंग और बच्चों की एक्टिविटीज़ पर कंटेंट बनाती हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनका मानना है कि 1 साल के बच्चे का सबसे बड़ा क्लासरूम खेल का मैदान है — बशर्ते माता-पिता खेल को सही दिशा में सीखने में बदल दें।

मोनिका साहा की 8 आसान टिप्स: खेल-खेल में सीखेगा बच्चा

इन तरीकों के लिए न महंगे खिलौनों की जरूरत है, न खास तैयारी की — घर की रोजमर्रा की चीजें और माता-पिता का समय ही काफी है:

  1. शरीर के अंगों के नाम खेल में सिखाएं — “तुम्हारी नाक कहां है?” पूछें। बच्चा खेलते-खेलते अंगों के नाम याद करता है और सुनकर जवाब देना सीखता है।
  2. रोज दिखने वाली चीजों के नाम बताएं — गेंद, कार, किताब, कप, चम्मच का नाम बार-बार दोहराएं। इससे बच्चे की शब्दावली मजबूत होती है।
  3. जानवरों और उनकी आवाजों से परिचय कराएं — तस्वीरों या किताबों से कुत्ता, बिल्ली, बत्तख दिखाएं और उनकी आवाज निकालें। इससे पहचानने की क्षमता और भाषा दोनों बढ़ती हैं।
  4. खेल और कपड़ों के जरिए रंग सिखाएं — “ये लाल गेंद है”, “नीली शर्ट पहनो” — रोज की बातचीत में रंगों के नाम जोड़ते जाएं।
  5. इशारों के साथ आसान एक्शन वर्ड्स सिखाएं — “आओ”, “बैठो”, “ताली बजाओ” — शब्द के साथ इशारा भी करें। बच्चा पहले नकल करता है, फिर शब्द बोलता है।
  6. छोटे सरल निर्देश देना शुरू करें — “गेंद लाकर दो” जैसे एक-चरण वाले निर्देश दें। कोशिश पर तारीफ जरूर करें — इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
  7. कारण और परिणाम खुद देखने दें — बटन दबाने से आवाज आती है, धक्के से गाड़ी चलती है — बच्चे को खुद करके देखने दें। इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है।
  8. छोटे काम खुद करने दें — खुद खाना, पानी पीना, खिलौने समेटना, किताब के पन्ने पलटना। गलतियां होंगी, पर इसी से आत्मनिर्भरता बढ़ती है।

(एनडीटीवी की मूल रिपोर्ट यहां पढ़ें)

टाइमलाइन: 1 से 3 साल तक बच्चे के बड़े विकास पड़ाव

बाल विकास के मानक पैमानों के मुताबिक इस उम्र में बच्चे आमतौर पर इन पड़ावों से गुजरते हैं — हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है, ये सिर्फ सामान्य दिशा-निर्देश हैं:

  • 12 महीने: सहारा लेकर खड़ा होना और पहला कदम, “मामा-पापा” जैसे पहले शब्द, बाय-बाय करना।
  • 15 महीने: बिना सहारे कुछ कदम चलना, उंगलियों से खुद खाना, जानी चीजों की तरफ इशारा करना।
  • 18 महीने: अकेले चलना, कई शब्द बोलना, पूछने पर शरीर के अंगों की तरफ इशारा करना।
  • 2 साल: दौड़ना और गेंद को ठोकर मारना, दो शब्दों के छोटे वाक्य बोलना।
  • 3 साल: “कौन, क्या, कहां” पूछना, अपना नाम बताना, गोला बनाना, सीढ़ियां चढ़ना।

उम्र के हिसाब से विकास: एक नजर में

उम्रभाषा और बोलीचलना-फिरनाखेल और सीखना
1 सालपहले शब्द (“मामा”, “पापा”), इशारों से बातचीतसहारे से खड़ा होना, पहला कदमछुपन-छुपाई, आवाज वाले खिलौने, नकल करना
18 महीनेकई शब्द, शरीर के अंगों के नाम पहचाननाअकेले चलना, छोटी चीजें उठानाआकार छांटने वाले खिलौने, किताब के पन्ने पलटना
2 सालदो शब्दों के वाक्य, सवालों का जवाब इशारे या शब्दों मेंदौड़ना, गेंद को ठोकर मारनानकली खेल, रंग और आकार पहचानना

इसका मतलब क्या है?

बाल विकास विशेषज्ञों के मुताबिक 1 से 3 साल की उम्र में खेल ही बच्चे की पढ़ाई है — बच्चा खेलते हुए भाषा, सोच और भावनाएं सीखता है। यूनिसेफ की पेरेंटिंग गाइडेंस भी “रिस्पॉन्सिव केयरगिविंग” पर जोर देती है: बच्चे से बात करना, उसके इशारों का जवाब देना और खेल में शामिल होना ही दिमाग के शुरुआती विकास की नींव है। मोनिका साहा की टिप्स इसी सिद्धांत का घरेलू रूप हैं — अलग से समय निकालने के बजाय रोज के खेल और बातचीत को सीखने में बदल दिया जाए। (यूनिसेफ पेरेंटिंग गाइडेंस)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 1 साल के बच्चे को सच में कुछ सिखाया जा सकता है?
हां — किताबी पढ़ाई नहीं, लेकिन खेल, बातचीत और नकल के जरिए बच्चा इस उम्र में सबसे तेजी से सीखता है। शब्दों को बार-बार सुनना ही भाषा की नींव बनाता है।

क्या बच्चे को मोबाइल या स्क्रीन से सिखाना ठीक है?
बाल रोग विशेषज्ञ 18 महीने से छोटे बच्चों के लिए वीडियो कॉल को छोड़कर स्क्रीन से बचने की सलाह देते हैं। असली बातचीत और खेल स्क्रीन से ज्यादा असरदार है।

अगर बच्चा देर से बोल रहा है तो क्या करें?
हर बच्चा अपनी गति से बढ़ता है। लेकिन 18 महीने तक कुछ शब्द न बोले या नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न दे, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।

इन टिप्स के लिए क्या महंगे खिलौने चाहिए?
नहीं। कप, चम्मच, गेंद, किताबें ही सबसे अच्छे “खिलौने” हैं — सबसे जरूरी चीज माता-पिता का समय और बातचीत है।

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