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छत्तीसगढ़ की धुन पर AR Rahman का कमाल: ‘ससुराल गेंदा फूल’ में 3 गायिकाओं ने दी आवाज़, ससुराल में आज भी गाती हैं बहुएं

छत्तीसगढ़ की धुन पर AR Rahman का कमाल: 'ससुराल गेंदा फूल' में 3 गायिकाओं ने दी आवाज़, ससुराल में आज भी गाती हैं बहुएं

बॉलीवुड में कई गाने ऐसे हैं जो रिलीज़ के सालों बाद भी लोगों की ज़ुबान पर रहते हैं, और ससुराल गेंदा फूल उन्हीं में से एक है। साल 2009 में रिलीज़ हुई राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म दिल्ली-6 का यह गाना आज भी शादियों और पारिवारिक मौकों पर खूब बजता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस गाने की जड़ें छत्तीसगढ़ की संस्कृति से जुड़ी हुई हैं? छत्तीसगढ़ी लोकगीत की इस धुन को ए. आर. रहमान ने अपने अंदाज़ में फिल्मी संगीत में ढाला था, और इसमें तीन गायिकाओं ने अपनी आवाज़ दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ससुराल गेंदा फूल असल में एक पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकगीत है, जिसे नई बहुएं अपने ससुराल में गाती आई हैं। सैयां, ननद, सास और देवर के साथ छेड़छाड़ और मान-मनौव्वल की यह झलक असल में छत्तीसगढ़ी घरों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से निकलती है। यही वजह है कि गाने के बोल में रायपुर का ज़िक्र भी आता है — “पूरे रायपुर से अलग है सैयां जी की शान।” रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है, और यह एक पंक्ति गाने की मिट्टी से उसके जुड़ाव की सबसे बड़ी पहचान है।

ससुराल गेंदा फूल: तीन गायिकाओं की आवाज़

ससुराल गेंदा फूल को रेखा भारद्वाज, श्रद्धा पंडित और सुजाता मजूमदार ने गाया है। तीनों की आवाज़ें मिलकर गाने में वह ठेठ लोक अंदाज़ लाती हैं, जो छत्तीसगढ़ी गीतों की पहचान है। गाने के बोल प्रसून जोशी ने लिखे, जबकि संगीत ए. आर. रहमान ने तैयार किया — उनके साथ सह-संगीतकार के तौर पर रजत ढोलकिया भी जुड़े थे। लोकधुन को फिल्मी साउंड के साथ इस तरह मिलाना रहमान की खासियत रही है, और इस गाने में वह साफ सुनाई देती है।

गाने की शुरुआत “ओए होए होए” की ललकार से होती है, जो छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के पारंपरिक अंदाज़ की याद दिलाती है। फिर “सैयां छेड़ देवे, ननद चुटकी लेवे, ससुराल गेंदा फूल” जैसी पंक्तियां आती हैं, जो सीधे नई बहू की भावनाओं को छूती हैं — “छोड़ा बाबुल का अंगना, भावे डेरा पिया का।” यही सादगी और सच्चाई इस गाने को खास बनाती है।

दिल्ली-6 में गाने की फिल्मांकन

दिल्ली-6 में यह गाना पुरानी दिल्ली की एक छत पर फिल्माया गया था। फिल्म में रोशन (अभिषेक बच्चन) अपनी दादी (वहीदा रहमान) को लेकर अमेरिका से भारत आता है, और मोहल्ले की औरतें छत पर लाल मिर्च का अचार बनाते हुए यह गाना गाने लगती हैं। पड़ोस की छतों से भी लोग इस धुन में शामिल हो जाते हैं। इस सीन में पुरानी दिल्ली की गलियों, मोहल्लों और सामुदायिक ज़िंदगी की जो झलक मिलती है, वही दिल्ली-6 की आत्मा है। फिल्म में अभिषेक बच्चन, सोनम कपूर, अतुल कुलकर्णी, दिव्या दत्ता, ओम पुरी, ऋषि कपूर और वहीदा रहमान जैसे कलाकार नज़र आए थे।

ए. आर. रहमान और दिल्ली-6 का संगीत

दिल्ली-6 का साउंडट्रैक ए. आर. रहमान के करियर के सबसे सराहे गए एल्बमों में गिना जाता है। मसकली, अर्ज़ियां, रेहना तू और गेंदा फूल जैसे गानों ने इसे खास बनाया था। फिल्म समीक्षकों ने इस एल्बम को रहमान के बेहतरीन कामों में से एक बताया था। गौरतलब है कि दिल्ली-6 2009 में आई थी — वही साल जब रहमान ने स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए दो ऑस्कर पुरस्कार जीते थे। “मोज़ार्ट ऑफ मद्रास” के नाम से मशहूर रहमान ने तमिल सिनेमा से लेकर हॉलीवुड तक अपनी धुनों का जादू बिखेरा है।

रहमान की खासियत रही है कि वे लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस तरह मिलाते हैं कि दोनों की आत्मा बनी रहती है। ससुराल गेंदा फूल इसका बेहतरीन उदाहरण है — छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू वाला एक लोकगीत, जो रहमान के संगीत में ढलकर पूरे देश तक पहुंचा।

लोकगीत से फिल्मी गीत तक का सफर

छत्तीसगढ़ में लोकगीत शादी-ब्याह और पारिवारिक उत्सवों का अहम हिस्सा हैं। ससुराल गेंदा फूल जैसे गाने वहां की बहुएं अपने ससुराल के रिश्तों — सास, ननद, देवर और पति — को लेकर गाती हैं। जब यही भावना फिल्मी परदे पर आई, तो यह सिर्फ एक गाना नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति की पहचान बन गया। आज भी छत्तीसगढ़ के घरों में यह गाना उतना ही अपना लगता है, जितना देश के बाकी हिस्सों में।

सत्रह साल बाद भी ससुराल गेंदा फूल की लोकप्रियता इस बात का सबूत है कि अच्छी धुन और सच्चे बोल कभी पुराने नहीं होते। छत्तीसगढ़ की धरती से निकली यह धुन भारतीय फिल्म संगीत के सबसे प्यारे लोक-प्रेरित गानों में हमेशा गिनी जाएगी।

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स्रोत: विकिपीडिया — दिल्ली-6 (साउंडट्रैक), Gaana — गेंदा फूल (दिल्ली-6)

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