भारतीय टेलीविज़न इंडस्ट्री के सामने आज सबसे बड़ा सवाल BARC TRP के भविष्य को लेकर है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश दिया है कि नई TV Ratings Policy 2026 के तहत लाइसेंस रिन्यू होने तक साप्ताहिक टीवी रेटिंग्स का प्रकाशन रोका जाए — और यह रोक सिर्फ़ न्यूज़ चैनलों तक सीमित नहीं, बल्कि एंटरटेनमेंट, मूवीज़, स्पोर्ट्स, रीजनल और इन्फोटेनमेंट समेत सभी जॉनर पर लागू है।
BARC TRP दशकों से टीवी इंडस्ट्री की “कॉमन करेंसी” रही है — इसी के आधार पर चैनल अपने विज्ञापन दर तय करते हैं, ब्रांड्स मीडिया प्लानिंग करते हैं और शो की सफलता नापी जाती है। BARC ने देशभर में 45,000 से ज़्यादा घरों में BAR-O-मीटर लगाए हैं, जो हर मिनट की व्यूअरशिप रिकॉर्ड करते हैं। लेकिन जुलाई 2026 से यह पूरी व्यवस्था ठप है — 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के विज्ञापन बाज़ार ने अचानक अपना मुख्य मापदंड खो दिया है।
BARC TRP ब्लैकआउट की टाइमलाइन
- 2010: विज्ञापनदाताओं, एजेंसियों और प्रसारकों के संयुक्त उद्योग निकाय के रूप में BARC की स्थापना।
- जुलाई 2015: मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत BARC टीवी रेटिंग एजेंसी के रूप में पंजीकृत; TAM से ट्रांज़िशन के कारण उस साल रेटिंग प्रकाशन कुछ समय रुका।
- 2019: TRAI के न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) लागू होने पर दूसरी बार इंडस्ट्री-वाइड रेटिंग निलंबन।
- 2020: TRP स्कैम विवाद के बाद न्यूज़ चैनलों की रेटिंग पर ब्लैकआउट।
- जुलाई 2026: MIB ने BARC को सभी जॉनर की साप्ताहिक BARC TRP रेटिंग तुरंत रोकने का निर्देश दिया; लाइसेंस रिन्यूअल नई TV Ratings Policy 2026 के तहत ही होगा।
- जुलाई 2026: केरल हाईकोर्ट ने लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को रेटिंग से बाहर रखने के सरकारी आदेश पर अंतरिम स्टे हटाया — कोर्ट के मुताबिक मापन की कार्यप्रणाली सरकारी सार्वजनिक नीति का विषय है, न कि व्यावसायिक हक।
- सितंबर 2026 (रिपोर्टेड): BARC टीवी और OTT दोनों का डेटा एक साथ जुटाकर एकीकृत रेटिंग देने की योजना पर काम कर रहा है।
लैंडिंग पेज TRP विवाद क्या है?
टीवी रेटिंग पर सबसे तीखी बहस “लैंडिंग पेज” को लेकर है — सेट-टॉप बॉक्स चालू करते ही डिफ़ॉल्ट दिखने वाला चैनल। कई चैनल इस प्लेसमेंट के लिए केबल ऑपरेटरों को भुगतान करते हैं, जिससे उनकी TRP कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है। केरल हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसके तहत लैंडिंग पेज की व्यूअरशिप रेटिंग में गिनी नहीं जाएगी; कोर्ट के मुताबिक व्यावसायिक मुनाफ़ा लैंडिंग पेज TRP को जायज़ नहीं ठहरा सकता। मंत्रालय अब ऐसी प्रणाली को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है जो लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को फ़िल्टर करेगी — और यही वजह है कि आज BARC TRP के अस्तित्व पर सवाल उठ रहे हैं।
आंकड़ों में पूरा मामला
| मापदंड | आंकड़ा |
|---|---|
| टीवी विज्ञापन बाज़ार जो TRP पर निर्भर है | 30,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा |
| BARC के मौजूदा मीटर वाले घर | 45,000 से अधिक |
| नई पॉलिसी में पीपल मीटर्स का लक्ष्य | 80,000 घर |
| पे-TV रेवेन्यू में अनुमानित गिरावट (FY2026) | 1–3% (ICRA अनुमान) |
| बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों का अनुपात | 50% से घटाकर 33% |
| अनुपालन के लिए समयसीमा | 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन |
इसका मतलब क्या है?
BARC TRP ब्लैकआउट का असर सिर्फ़ आंकड़ों तक सीमित नहीं है — यह पूरे कारोबारी मॉडल को हिला रहा है। Rediffusion के चेयरमैन संदीप गोयल का कहना है कि बिना रेटिंग डेटा के ब्रांड्स के लिए यह जांचना मुश्किल होगा कि उनका विज्ञापन खर्च सही दर्शकों तक पहुंचा या नहीं, और ब्रॉडकास्टर अपनी विज्ञापन दरों को सही ठहराने में संघर्ष करेंगे। मीडिया एजेंसियों को अब ऐतिहासिक डेटा या थर्ड-पार्टी टूल्स पर निर्भर होना पड़ेगा, जिससे टारगेटिंग कम सटीक होगी। नरेश गुप्ता (Bang in the Middle) के मुताबिक, छोटे ब्रॉडकास्टर सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं — वे विज्ञापनदाताओं को आकर्षित करने के लिए TRP पर ही निर्भर रहते हैं। अंकुश विज (Hashtag Orange) के मुताबिक, इससे क्रॉस-प्लेटफॉर्म मापन पर ध्यान बढ़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि नई पॉलिसी का मकसद BARC के एकाधिकार को तोड़कर कई रेटिंग एजेंसियों के लिए रास्ता खोलना था, लेकिन अब तक किसी भी कंपनी ने लाइसेंस के लिए औपचारिक आवेदन नहीं किया है। ICRA के मुताबिक, OTT की ओर दर्शकों के बढ़ते पलायन से FY2026 में पे-TV रेवेन्यू में 1–3% की गिरावट का अनुमान है — जो सवाल को और गंभीर बनाता है: क्या TRP अब भी टीवी का भविष्य तय करेगी, या मापन की नई परिभाषा लिखी जाएगी?
BARC TRP पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
TRP क्या होती है?
टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट (TRP) बताती है कि किसी खास समय में कितने दर्शक कौन-सा चैनल या प्रोग्राम देख रहे हैं। BARC चुनिंदा घरों में पीपल्स मीटर लगाकर यह डेटा जुटाता है और हर हफ़्ते BARC TRP रेटिंग के रूप में प्रकाशित करता है।
रेटिंग प्रकाशन क्यों रोका गया?
MIB ने BARC को निर्देश दिया है कि नई TV Ratings Policy 2026 के तहत लाइसेंस रिन्यू होने तक कोई रेटिंग प्रकाशित न की जाए। इसके साथ बोर्ड पुनर्गठन, कड़े ऑडिट और कनेक्टेड TV के रोडमैप जैसी शर्तें भी जुड़ी हैं।
रेटिंग कब वापस आएगी?
तय तारीख नहीं है। मंत्रालय लैंडिंग पेज फ़िल्टर वाली नई प्रणाली को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है, पर BARC का पूर्ण लाइसेंस रिन्यूअल बाकी है।
इससे दर्शकों पर क्या असर पड़ेगा?
सीधा असर ब्रॉडकास्टरों और विज्ञापनदाताओं पर पड़ेगा — शो की सफलता नापने और विज्ञापन दर तय करने का स्वतंत्र मानक फ़िलहाल उपलब्ध नहीं है।
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यह विश्लेषण exchange4media और The Hindu BusinessLine की रिपोर्टिंग पर आधारित है।
