कमाई और लाइफस्टाइल में गुड़गांव का कोई मुकाबला नहीं, 8 साल से रह रहे IndiaGold के Deepak Abbot बोले, कम्फर्ट बबल खुद बनाओ
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कमाई और लाइफस्टाइल में गुड़गांव का कोई मुकाबला नहीं, 8 साल से रह रहे IndiaGold के Deepak Abbot बोले, कम्फर्ट बबल खुद बनाओ

8 साल से गुड़गांव में रह रहे हैं IndiaGold के Deepak Abbot, फिर भी नहीं बदलना चाहते शहर

गुड़गांव को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। फिनटेक कंपनी IndiaGold के को-फाउंडर Deepak Abbot ने कहा है कि वे 8 साल से गुड़गांव में रह रहे हैं और चाहें तो शहर छोड़कर जा सकते हैं, लेकिन उन्हें भारत का ऐसा कोई दूसरा शहर नहीं दिखता जो कमाई के वही अवसर और लाइफस्टाइल एक साथ दे सके। उनका कहना है कि भारत का कोई भी शहर पूरी तरह ‘लिवेबल’ नहीं है — हर शहर की अपनी कमियां हैं, और लोगों को अपने आसपास ‘कम्फर्ट बबल’ खुद बनाना पड़ता है। Deepak Abbot की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर X पर हुई एक बहस के बीच आई है।

यह पूरा मामला X पर 27 सितंबर को शुरू हुआ, जब एक यूजर कार्थिका (@Kaynvas) ने लिखा कि वे गुड़गांव में हैं और उन्हें हैरानी है कि इतने ज्यादा सैलरी वाले लोग अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इसी शहर में बिताने का फैसला करते हैं। इस पर 28 सितंबर शाम 5:55 बजे Deepak Abbot ने जवाब दिया। उनके जवाब को आर्टिकल के अनुसार 114.4 हजार व्यूज, 588 लाइक्स, 86 रिप्लाई, 37 रीपोस्ट और 70 बुकमार्क मिले।

Deepak Abbot ने क्या कहा: समस्याएं मानीं, पर कमाई और लाइफस्टाइल पर भरोसा

Deepak Abbot ने अपने जवाब में साफ कहा कि वे मानते हैं कि शहर में ढेरों समस्याएं हैं — कई हिस्सों में बारिश के मौसम में पानी भर जाता है और लोग इसकी अक्सर शिकायत करते हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने लिखा, “I’ve been living in Gurgaon for 8 years now. I HAVE the choice to leave, but I can’t think of another Indian city that would give me any better quality of life while offering me the same earning opportunities.” यानी, “मैं 8 साल से गुड़गांव में रह रहा हूं। मेरे पास शहर छोड़ने का विकल्प है, लेकिन मैं भारत के किसी और शहर के बारे में नहीं सोच सकता जो मुझे कमाई के वही अवसर देने के साथ बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ दे।”

उन्होंने आगे कहा कि कोई भी भारतीय शहर सच में ‘लिवेबल’ नहीं है, और हर किसी को शहर की खामियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए अपने आसपास आराम का एक दायरा (कम्फर्ट बबल) खुद बनाना होता है। Deepak Abbot के मुताबिक, गुड़गांव आने से पहले उन्होंने दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में लगभग 20 साल बिताए, और हर शहर में कुछ न कुछ दिक्कतें थीं। उनका कहना है कि जो लोग रोज अपने ही शहर की शिकायत करते हैं, वे आखिरकार अपनी ही जिंदगी मुश्किल बना रहे होते हैं।

टाइमलाइन: एक ट्वीट से शुरू हुई बहस

  • 27 सितंबर 2026: X यूजर कार्थिका (@Kaynvas) ने लिखा कि वे गुड़गांव में हैं और उन्हें हैरानी है कि इतने हाई-सैलरी वाले लोग अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इसी शहर में बिताते हैं।
  • 28 सितंबर 2026, शाम 5:55: IndiaGold के को-फाउंडर Deepak Abbot ने जवाब में कहा — 8 साल से गुड़गांव में हैं, कमाई के अवसरों और लाइफस्टाइल का कोई मुकाबला नहीं, हर शहर को अपने कम्फर्ट बबल के साथ स्वीकार करना पड़ता है।
  • 29 सितंबर 2026, दोपहर 1:33 (IST): नवभारत टाइम्स ने इस बहस पर आर्टिकल प्रकाशित किया (बिजनेस न्यूज सेक्शन, क्यूरेटर राजेश भारती)।
  • 2016: हरियाणा सरकार ने शहर का आधिकारिक नाम ‘गुड़गांव’ से बदलकर ‘गुरुग्राम’ किया, हालांकि आम बोलचाल में गुड़गांव नाम आज भी प्रचलित है।
  • 2000 का दशक: डीएलएफ साइबर सिटी और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों के आने से गुड़गांव तेजी से देश का बड़ा कॉर्पोरेट और स्टार्टअप हब बना।
  • 1980 का दशक: मारुति उद्योग के प्लांट के साथ गुड़गांव औद्योगिक नक्शे पर आया — यहीं से इसके शहरीकरण की नींव पड़ी।

X पोस्ट एक नज़र में

पहलूविवरण
प्लेटफॉर्मX (पहले ट्विटर) — Deepak Abbot का वेरिफाइड हैंडल @deepakabbot
पोस्ट की तारीख28 सितंबर 2026, शाम 5:55 बजे
व्यूज114.4 हजार
लाइक्स / रिप्लाई / रीपोस्ट / बुकमार्क588 / 86 / 37 / 70
किसके जवाब मेंकार्थिका (@Kaynvas) के 27 सितंबर के पोस्ट के जवाब में
गुड़गांव में निवास8 साल
पहले रह चुके शहरदिल्ली, मुंबई, हैदराबाद — लगभग 20 साल

इसका मतलब क्या है?

गुड़गांव दशकों से एक विरोधाभासी शहर रहा है — एक तरफ डीएलएफ साइबर सिटी जैसी गगनचुंबी इमारतें, मल्टीनेशनल कंपनियों के दफ्तर और स्टार्टअप इकोसिस्टम, तो दूसरी तरफ ट्रैफिक जाम, बारिश में जलभराव और प्रदूषण जैसी नागरिक समस्याएं। Deepak Abbot की टिप्पणी इसी द्वंद्व को दर्शाती है: वे शहर की खामियों से इनकार नहीं करते, लेकिन उनके लिए फैसला ‘कमाई के अवसर + लाइफस्टाइल’ के समीकरण पर टिका है। यह बहस सिर्फ गुड़गांव तक सीमित नहीं है — बड़े शहरों में रहने वाले प्रोफेशनल अक्सर इसी सवाल से जूझते हैं कि नौकरी के अवसर ज्यादा मायने रखते हैं या नागरिक सुविधाएं। अबॉट का ‘कम्फर्ट बबल’ वाला तर्क दरअसल इसी समझौते को शब्द देता है।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस बयान पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई रहीं। कुछ यूजर्स ने गुड़गांव के बिजनेस और स्टार्टअप इकोसिस्टम की तारीफ की — एक कमेंटर ने कहा कि सड़क पर भरा पानी और प्रदूषण समस्याएं हैं, लेकिन लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स का ऐसा इकोसिस्टम किसी दूसरे भारतीय शहर में आसानी से नहीं मिलता। वहीं, कई यूजर्स ने ट्रैफिक, प्रदूषण, जलभराव और बुनियादी ढांचे की समस्याओं का हवाला दिया। एक यूजर, जो दिल्ली, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु में रह चुका है, ने गुड़गांव को सबसे खराब शहरों में से एक बताया। एक अन्य ने कहा कि शहर चुनना सिर्फ ट्रैफिक, मौसम या बुनियादी ढांचे के बारे में नहीं है — परिवार, नौकरी, दोस्त, स्कूल और लाइफस्टाइल भी मायने रखते हैं। कुछ यूजर्स ने यह भी पूछा कि क्या ‘बबल’ में रहकर खराब ट्रैफिक, मौसम और प्रदूषण को नजरअंदाज किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: Deepak Abbot कौन हैं?
जवाब: Deepak Abbot फिनटेक कंपनी IndiaGold के को-फाउंडर हैं। उनका X हैंडल @deepakabbot वेरिफाइड है।

सवाल: उन्होंने गुड़गांव को लेकर क्या कहा?
जवाब: उन्होंने कहा कि वे 8 साल से गुड़गांव में रह रहे हैं और चाहें तो शहर छोड़ सकते हैं, लेकिन उन्हें भारत का कोई ऐसा दूसरा शहर नहीं दिखता जो कमाई के वही अवसर और बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ एक साथ दे। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी भारतीय शहर पूरी तरह ‘लिवेबल’ नहीं है।

सवाल: क्या उन्होंने शहर की समस्याओं को नकारा?
जवाब: नहीं। उन्होंने स्वीकार किया कि शहर में ढेरों समस्याएं हैं — बारिश में कई हिस्सों में पानी भर जाता है और लोग इसकी शिकायत करते हैं। उनका तर्क है कि हर शहर की अपनी कमियां होती हैं और लोगों को अपने आसपास कम्फर्ट बबल बनाकर रहना होता है।

सवाल: यह बयान किस संदर्भ में आया?
जवाब: X पर 27 सितंबर को कार्थिका (@Kaynvas) ने लिखा था कि उन्हें हैरानी है कि इतने हाई-सैलरी वाले लोग गुड़गांव में रहते हैं। इसके जवाब में Deepak Abbot ने 28 सितंबर शाम 5:55 बजे यह टिप्पणी की।

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स्रोत: नवभारत टाइम्स — ‘गुड़गांव में ढेरों समस्याएं लेकिन…’, बिजनेसमैन ने कहा- कमाई और लाइफस्टाइल में इसके जैसा दूसरा शहर नहीं