बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता मुश्ताक खान का गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को मुंबई में निधन हो गया। वह 56 साल के थे और लंबे समय से कैंसर से जंग लड़ रहे थे। उनके बिजनेस पार्टनर शिवम ने बताया कि मुश्ताक खान ने गुरुवार शाम करीब 7 बजे आखिरी सांस ली। फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह एक बड़ा झटका है — चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने दर्जनों यादगार किरदार निभाए थे।
मुश्ताक खान के निधन की पुष्टि FWICE के अध्यक्ष बीएन तिवारी और उनके बिजनेस पार्टनर शिवम ने की है। बीएन तिवारी ने बताया कि अभिनेता कई दिनों से बीमार चल रहे थे और वह उनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं। शिवम के मुताबिक, मुश्ताक खान को पहले कैंसर हुआ था जिससे वह उबर गए थे, लेकिन करीब आठ दिन पहले बीमारी दोबारा लौट आई और आखिरी स्टेज पर पहुंच गई थी। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार, 25 सितंबर को होगा।
नानावटी अस्पताल के ICU में ली आखिरी सांस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुश्ताक खान को तबीयत बिगड़ने पर मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में रखा गया था। गुरुवार शाम उनकी हालत और बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अभिनेता लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर आते ही फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई।
‘वेलकम’ के बालू से घर-घर पहुंचे मुश्ताक खान
मुश्ताक खान ने 1980 में फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद चार दशकों तक वह हिंदी सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बने रहे। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2007 की कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ में बालू के किरदार से मिली — एक दिव्यांग हॉकी खिलाड़ी का उनका अभिनय और नकली टांग वाला मशहूर सीन आज भी दर्शकों को हंसाता है।
इसके अलावा उन्होंने ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘राजा’, ‘हेरा फेरी’, ‘गदर: एक प्रेम कथा’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वांटेड’ और ‘ओह माय गॉड’ जैसी फिल्मों में यादगार सहायक भूमिकाएं निभाईं। हाल के सालों में वह ‘स्त्री’, ‘बधाई दो’, ‘गदर 2’, ‘स्त्री 2’, ‘वनवास’, ‘बेबी जॉन’, ‘धूम धाम’ और ‘जाट’ में भी नजर आए। टेलीविजन पर उन्होंने ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ जैसे शोज में काम किया।
थिएटर से बॉलीवुड तक का सफर
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर कस्बे में जन्मे मुश्ताक खान ने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। मुंबई आने के बाद वह नाटकों में काम कर रहे थे, तभी अभिनेता और लेखक सलीम खान ने उनका काम देखा और उन्हें फिल्मकार महेश भट्ट से मिलवाया। इस तरह उन्हें फिल्म ‘कब्ज़ा’ में मौका मिला और महेश भट्ट के साथ उनका लंबा पेशेवर रिश्ता बन गया।
90 के दशक में वह एक भरोसेमंद सहायक अभिनेता के तौर पर स्थापित हो गए। उनकी कॉमिक टाइमिंग और खास अंदाज ने उन्हें बड़े कलाकारों वाली फिल्मों में भी अलग पहचान दिलाई। अपने लंबे करियर में उन्होंने फिल्मों, टेलीविजन और स्टेज — तीनों माध्यमों में काम किया।
फिल्म इंडस्ट्री में शोक
मुश्ताक खान अपने पीछे पत्नी सलमा खान और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। उनके निधन पर फिल्म जगत के कई लोगों ने दुख जताया है। FWICE अध्यक्ष बीएन तिवारी ने कहा कि इंडस्ट्री ने एक मेहनती और प्रतिभाशाली कलाकार खो दिया है।
बॉलीवुड में सहायक कलाकारों की दुनिया में मुश्ताक खान का नाम हमेशा याद रखा जाएगा — वह उन चुनिंदा चेहरों में से थे जिन्हें दर्शक नाम से न भी जानें, तो भी पर्दे पर देखते ही पहचान लेते थे। ‘वेलकम’ के बालू के रूप में उनकी हंसी-मजाक वाली अदाकारी आने वाली पीढ़ियों को भी हंसाती रहेगी।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और विकिपीडिया पर मुश्ताक खान।
