फिल्मीबीट को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में फिल्ममेकर जैमिन बाल ने अपनी नई साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘द सैलासिटी’ और अपने फिल्ममेकिंग सफर पर खुलकर बात की। कभी ‘ओम शांति ओम’ के सेट पर जूनियर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करने वाले जैमिन बाल आज अमेरिका में एक स्वतंत्र फिल्ममेकर हैं, और उनकी हालिया रिलीज ‘द सैलासिटी’ प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है (यह फिल्म अभी भारत में उपलब्ध नहीं है)।
इंटरव्यू में जैमिन बाल ने बताया कि उन्हें ऐसी कहानियां क्यों खींचती हैं जो इंसानी व्यवहार के अंधेरे पहलुओं को छूती हैं। उनका कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा दिलचस्पी उस फासले में है, जो हमारी खुद की छवि और हमारे असल फैसलों के बीच होता है। कोई व्यक्ति वफादारी की बातें करता है और दूसरों का भरोसा तोड़ देता है; कोई अपनी नेकी पर इतना यकीन कर लेता है कि अपने काम की क्रूरता देखना ही बंद कर देता है। जैमिन के मुताबिक, यही विरोधाभास फिल्ममेकर के लिए खोजने लायक खजाना है।
‘द सैलासिटी’ में धोखा, भरोसा और कंट्रोल का खेल
‘द सैलासिटी’ में बेवफाई की कहानी भरोसे, फैसले और दूसरों की जिंदगी पर काबू पाने की चाहत जैसे सवाल खड़े करती है। फिल्म का एक किरदार ब्लैकमेलर है, जिसे लगता है कि उसे दूसरों को सजा देने का नैतिक अधिकार है। जैमिन बाल कहते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा यही बात चौंकाती है — कैसे किसी का पक्का यकीन दूसरों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत में बदल जाता है। उनका मानना है कि साइकोलॉजिकल थ्रिलर इन सवालों को किरदारों के व्यवहार और उसके नतीजों के जरिए खोलती है।
फिल्म का केंद्रीय किरदार यह मानता है कि वह सही कर रहा है, भले ही उसके काम लगातार परेशान करने वाले होते जाएं। जैमिन के मुताबिक, वह चाहते हैं कि दर्शक उसके नैतिक आचरण पर सवाल उठाएं और साथ ही न्याय और धोखे के बारे में अपने खुद के विश्वासों पर भी सोचें। उनका कहना है कि किसी किरदार के तर्क को समझने का मतलब उससे सहमत होना नहीं है — फिल्म का नैतिक तनाव इसी जगह पर खड़ा है।
मोरली ग्रे किरदारों पर क्या सोचते हैं जैमिन?
इंटरव्यू में जब पूछा गया कि क्या आज के दर्शक सीधे-सादे हीरो-विलेन से ज्यादा मोरली ग्रे किरदारों की ओर खिंचते हैं, तो जैमिन ने कहा कि दर्शक ऐसे किरदारों से जुड़ते हैं जिनके व्यवहार को वे समझ सकें, भले ही वह व्यवहार उन्हें असहज करे। उनके मुताबिक, ‘मोरली ग्रे’ कह देना ही किसी किरदार को दिलचस्प नहीं बनाता — एक हीरो भी गहरा हो सकता है और एक खतरनाक किरदार भी सतही, अगर लेखन सिर्फ चौंकाने पर टिका हो। उन्हें इसमें दिलचस्पी है कि व्यक्ति क्या चाहता है, वह क्या सही ठहराने को तैयार है और क्या वह अपने किए नुकसान को पहचान पाता है।
मॉरीशस में शूट हुई फिल्म, जैमिन बने प्रोड्यूसर-डायरेक्टर
जैमिन बाल ने बताया कि ‘द सैलासिटी’ एक अंग्रेजी भाषा की फिल्म है, जिसे मॉरीशस में शूट किया गया है और इसमें अंतरराष्ट्रीय कलाकार हैं। इस फिल्म में वह डायरेक्टर के साथ-साथ प्रोड्यूसर की भूमिका में भी हैं। स्वतंत्र फिल्ममेकिंग के बारे में उन्होंने कहा कि आजादी से अपनी सोच को आगे बढ़ाने की जगह तो मिलती है, लेकिन इसके साथ व्यावहारिक जिम्मेदारियां भी आती हैं — संसाधन जुटाना, टीम बनाना और तैयार फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाना। उनके मुताबिक, स्वतंत्र फिल्ममेकर अपने आप स्टूडियो डायरेक्टरों से ज्यादा आजाद नहीं होते; दोनों की अपनी-अपनी सीमाएं होती हैं, और असली चुनौती इन्हीं सीमाओं के भीतर फिल्म की मंशा को बचाए रखने की होती है।
फराह खान से मिली सबसे बड़ी सीख
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए जैमिन बाल ने बताया कि ‘ओम शांति ओम’ पर जूनियर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर उन्होंने फराह खान को काम करते हुए देखा था। फराह की ऊर्जा, ईमानदारी और काम करने की रफ्तार ने उन पर गहरा असर डाला। जैमिन कहते हैं कि फराह को देखकर उन्होंने समझा कि डायरेक्शन सिर्फ तकनीकी काम नहीं है — इसमें पूरी यूनिट को संभालना और अलग-अलग मांगों में संतुलन बनाना भी शामिल है। यही सीख आज भी उनके फिल्ममेकिंग के तरीके को आकार देती है।
टाइमलाइन
- शुरुआती दिन: जैमिन बाल ने ‘ओम शांति ओम’ के सेट पर जूनियर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया, जहां उन्होंने फराह खान से डायरेक्शन की बारीकियां सीखीं।
- सफर: इसके बाद वह अमेरिका में स्वतंत्र फिल्ममेकर बने और इंसानी व्यवहार के अंधेरे पहलुओं पर केंद्रित सिनेमा बनाने लगे।
- 2026: उनकी साइकोलॉजिकल थ्रिलर ‘द सैलासिटी’ रिलीज हुई — मॉरीशस में शूट, अंग्रेजी भाषा, अंतरराष्ट्रीय कलाकार, प्राइम वीडियो पर स्ट्रीमिंग (भारत में अभी उपलब्ध नहीं)।
- 2 नवंबर 2026: फिल्मीबीट को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने फिल्म के विषयों, मोरली ग्रे किरदारों और स्वतंत्र फिल्ममेकिंग की चुनौतियों पर बात की।
‘द सैलासिटी’ के बारे में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| फिल्म का नाम | द सैलासिटी |
| जॉनर | साइकोलॉजिकल थ्रिलर |
| डायरेक्टर-प्रोड्यूसर | जैमिन बाल |
| शूटिंग लोकेशन | मॉरीशस |
| भाषा | अंग्रेजी (अंतरराष्ट्रीय कलाकार) |
| स्ट्रीमिंग | प्राइम वीडियो (भारत में अभी उपलब्ध नहीं) |
| मुख्य विषय | बेवफाई, भरोसा, नैतिक अधिकार और कंट्रोल |
इसका मतलब क्या है?
यह इंटरव्यू इसलिए अहम है, क्योंकि यह एक ऐसे फिल्ममेकर की सोच को सामने लाता है जिसने बॉलीवुड के बड़े सेट से लेकर हॉलीवुड की स्वतंत्र फिल्ममेकिंग तक का सफर तय किया है। ‘द सैलासिटी’ जैसी फिल्में दिखाती हैं कि थ्रिलर सिर्फ डर या सस्पेंस का खेल नहीं, बल्कि इंसानी नैतिकता पर सवाल उठाने का जरिया भी हो सकता है। जैमिन बाल का यह मानना कि दर्शक को किरदार के तर्क को समझना चाहिए, उससे सहमत होना जरूरी नहीं — यही आधुनिक साइकोलॉजिकल थ्रिलर की सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि भारतीय दर्शकों को यह फिल्म देखने के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि यह प्राइम वीडियो पर भारत में उपलब्ध नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: ‘द सैलासिटी’ क्या है?
जवाब: यह जैमिन बाल की डायरेक्ट की हुई एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें बेवफाई, भरोसे और नैतिक अधिकार जैसे विषयों को एक ब्लैकमेलर किरदार के जरिए दिखाया गया है।
सवाल: ‘द सैलासिटी’ कहां देखी जा सकती है?
जवाब: फिल्म प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, लेकिन अभी भारत में उपलब्ध नहीं है।
सवाल: जैमिन बाल कौन हैं?
जवाब: जैमिन बाल एक भारतीय मूल के स्वतंत्र फिल्ममेकर हैं, जो अमेरिका में काम करते हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘ओम शांति ओम’ के सेट पर जूनियर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की थी।
सवाल: फराह खान से जैमिन ने क्या सीखा?
जवाब: जैमिन के मुताबिक, फराह खान की ऊर्जा, ईमानदारी और काम की रफ्तार ने उन पर गहरा असर डाला। उनसे उन्होंने सीखा कि डायरेक्शन में पूरी यूनिट को संभालना और तकनीकी काम के साथ-साथ अलग-अलग मांगों में संतुलन बनाना भी शामिल है।
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इस खबर का आधार फिल्मीबीट का 2 नवंबर 2026 का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू है। अधिक जानकारी के लिए देखें: Filmibeat — Jaimin Bal on The Salacity & Farah Khan।

