भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और बिहार भाजपा के एमएलसी पवन सिंह को उत्तर प्रदेश के एक फैमिली कोर्ट ने 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना पत्नी ज्योति सिंह की ओर से दायर मेंटेनेंस केस की सुनवाई में पेश न होने पर लगाया गया। शनिवार (17 अक्टूबर) को हुई सुनवाई अपर प्रधान न्यायाधीश कमलापति प्रजापति की अदालत में हुई।
पवन सिंह के वकील हरिवंश सिंह ने पीटीआई को बताया कि उनके मुवक्किल अपनी मां प्रतिमा देवी की तबीयत खराब होने के कारण अदालत नहीं पहुंच सके। वकील ने अदालत में मां के डॉक्टर का मेडिकल सर्टिफिकेट और मध्यस्थता (मेडिएशन) की अर्जी दाखिल की। इसके बावजूद अदालत ने 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय कर दी।
इस सुनवाई में ज्योति सिंह अपने वकील के साथ अदालत में मौजूद थीं। उन्होंने अदालत के बाहर पत्रकारों से कहा कि यह मामला चार साल पहले दायर हुआ था और अब सब्र की सीमा खत्म हो रही है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ज्योति सिंह ने अपने पति पर प्रभाव का इस्तेमाल कर न्यायिक प्रक्रिया में देरी करने का आरोप भी लगाया। फिल्मीबीट की खबर के मुताबिक अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जुर्माना लगाने का फैसला किया।
पवन सिंह मामले की टाइमलाइन
- 6 मार्च 2018: पवन सिंह और ज्योति सिंह का विवाह हुआ।
- 22 अप्रैल 2022: ज्योति सिंह ने फैमिली कोर्ट में मेंटेनेंस याचिका दायर की।
- 9 सितंबर 2022: सुनवाई में गैरहाजिरी पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगा।
- 5 अक्टूबर 2022: फिर सुनवाई में न पहुंचने पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगा।
- 5 नवंबर 2022: नोटिस के बाद पवन सिंह अदालत में पेश हुए।
- 17 अक्टूबर 2026: सुनवाई में गैरहाजिरी पर 3,000 रुपये का जुर्माना, अगली तारीख 12 नवंबर तय हुई।
मामले के अहम तथ्य
| विषय | विवरण |
|---|---|
| जुर्माना | 3,000 रुपये (सुनवाई में गैरहाजिरी पर) |
| अदालत | उत्तर प्रदेश का फैमिली कोर्ट |
| पीठासीन जज | अपर प्रधान न्यायाधीश कमलापति प्रजापति |
| याचिका | मेंटेनेंस केस, 22 अप्रैल 2022 को दायर |
| पवन सिंह का पक्ष | मां की तबीयत खराब, मेडिकल सर्टिफिकेट और मध्यस्थता की अर्जी दाखिल |
| अगली सुनवाई | 12 नवंबर |
पवन सिंह कौन हैं?
पवन सिंह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। गायक और अभिनेता के तौर पर उन्होंने दशकों तक भोजपुरी सिनेमा और संगीत में अपनी पहचान बनाई है। ‘लॉलीपॉप लागेलू’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर पहुंचाया और भोजपुरी दर्शकों के बीच उन्हें ‘पावर स्टार’ के नाम से जाना जाता है। फिल्मों के साथ-साथ वे मंचीय कार्यक्रमों और संगीत एल्बमों के जरिए भी लगातार दर्शकों से जुड़े रहे हैं।
बाद के वर्षों में पवन सिंह ने राजनीति में भी कदम रखा और बिहार से भाजपा के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बने। उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा यह मेंटेनेंस मामला पिछले करीब चार साल से अदालत में चल रहा है और समय-समय पर सुर्खियों में आता रहा है। ज़ूम टीवी की रिपोर्ट में भी इस सुनवाई और जुर्माने की यही जानकारी दी गई है।
इसका मतलब क्या है?
मेंटेनेंस याचिका फैमिली कोर्ट में दायर होने वाला एक कानूनी मामला होता है, जिसमें एक पक्ष दूसरे पक्ष से भरण-पोषण की मांग करता है। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को हर सुनवाई पर अदालत में मौजूद रहना होता है। किसी पक्ष के बार-बार गैरहाजिर रहने पर अदालत जुर्माना (कॉस्ट) लगा सकती है, ताकि सुनवाई टलने से मामले में बेवजह देरी न हो। मध्यस्थता यानी मेडिएशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक निष्पक्ष मध्यस्थ की मदद से दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामले को सुलझाने की कोशिश करते हैं। इस मामले में पवन सिंह की ओर से मध्यस्थता की अर्जी दी गई है, जिस पर अगली सुनवाई में अदालत का रुख सामने आएगा। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है और इसके नतीजे के बारे में कोई अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पवन सिंह पर कितना जुर्माना लगा है?
फैमिली कोर्ट ने सुनवाई में गैरहाजिरी पर पवन सिंह पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
पवन सिंह सुनवाई में क्यों नहीं पहुंचे?
उनके वकील के मुताबिक उनकी मां प्रतिमा देवी की तबीयत खराब थी। वकील ने अदालत में मेडिकल सर्टिफिकेट और मध्यस्थता की अर्जी दाखिल की।
मेंटेनेंस केस कब दायर हुआ था?
ज्योति सिंह ने 22 अप्रैल 2022 को फैमिली कोर्ट में मेंटेनेंस याचिका दायर की थी। दोनों का विवाह 6 मार्च 2018 को हुआ था।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय की है।

