फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज़ में भारतीय सिनेमा की ऑस्कर चयन प्रक्रिया पर सीधा निशाना साधा है। वरायटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में कश्यप ने कहा कि भारत ऑस्कर जैसे बड़े मंचों पर अक्सर “बिल्कुल गलत फिल्में” चुनता है, और इसकी सबसे बड़ी वजह चयन प्रक्रिया में फैली “पॉलिटिक्स” और “जागरूकता की कमी” है। यह बयान तब आया है, जब मराठी फिल्म गोंधल को 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है।
कश्यप ने कहा, “क्योंकि हम बिल्कुल गलत फिल्में चुनते हैं। भले ही हमारे पास द लंचबॉक्स और ऑल वी इमेजिन ऐज़ लाइट जैसी सही फिल्में चुनने का मौका था, हमने उसे भी बिगाड़ दिया।” हालांकि, कश्यप ने साफ किया कि उन्होंने गोंधल या चयन के लिए भेजी गई ज़्यादातर फिल्में देखी ही नहीं हैं, इसलिए किसी खास फिल्म पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। (इंडियन एक्सप्रेस)
अनुराग कश्यप ने बताई ऑस्कर के लिए सही योग्यता
कश्यप के मुताबिक ऑस्कर के लिए चुनी जाने वाली फिल्म की सबसे अहम योग्यता यह होनी चाहिए कि वह साल के आखिर तक भारत के बाहर किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई हो, या उसका अमेरिकन डिस्ट्रीब्यूशन पहले से तय हो चुका हो। बिना वैश्विक एक्सपोज़र के किसी फिल्म को सीधे ऑस्कर की दौड़ में भेज देना, उनके हिसाब से व्यर्थ की मेहनत है।
गोंधल को लेकर अनुराग कश्यप ने सलाह दी, “गोंधल को पहले फेस्टिवल्स में दिखने की कोशिश करनी चाहिए। यही पहला कदम होना चाहिए, वरना स्क्रीनिंग या विज्ञापन पर खर्च किया गया सारा पैसा बर्बाद है।” उन्होंने कहा कि अगर गोंधल ने IFFI में सिल्वर पीकॉक जीता है, तो NFDC को अपने क्षेत्रीय विजेताओं को अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल्स में भेजने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
‘द लंचबॉक्स’ और ‘ऑल वी इमेजिन ऐज़ लाइट’ का ज़िक्र क्यों अहम है
कश्यप ने जिन दो फिल्मों का नाम लिया, वे भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित ऑस्कर चूकों में गिनी जाती हैं। 2013 में इरफान खान-निमरत कौर स्टारर द लंचबॉक्स को समीक्षकों ने भारत की सबसे मज़बूत दावेदारों में माना था, लेकिन फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उस साल द गुड रोड को आधिकारिक एंट्री भेजा था। इसी तरह 2024 में कान में ग्रां प्री जीतने वाली पायल कपाड़िया की ऑल वी इमेजिन ऐज़ लाइट को भी भारत की आधिकारिक एंट्री नहीं बनाया गया।
गौरतलब है कि 2001 में आशुतोष गोवारिकर की लगान के बाद से कोई भारतीय फिल्म इस कैटेगरी में नॉमिनेशन तक नहीं पहुंच पाई है। हर साल FFI की ज्यूरी चयन करती है, और लगभग हर साल यह फैसला बहस को जन्म देता है — सवाल हर बार वही: क्या सही फिल्म चुनी गई?
गोंधल के निर्देशक संतोष दवखर का जवाब: ‘फैसला सुनाने से पहले फिल्म देखिए’
अनुराग कश्यप के बयान पर गोंधल के निर्देशक संतोष दवखर ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने याद दिलाया कि 26 अप्रैल को बेंगलुरु-मुंबई फ्लाइट में उन्होंने खुद कश्यप को गोंधल के बारे में बताया था, और तब कश्यप ने कहा था कि उन्होंने यह फिल्म न तो सुनी है, न देखी है, लेकिन वे ज़रूर देखेंगे। दवखर का दावा है कि उसके बाद से फिल्म न तो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हुई, न ही मुंबई में कहीं दिखाई गई।
दवखर ने लिखा, “मेरी सभी दर्शकों से विनम्र अपील है — कृपया फैसला सुनाने से पहले फिल्म देखिए।” उनके मुताबिक फिल्म जगत से बाहर के एक डेब्यू फिल्ममेकर द्वारा बनाई गई गोंधल मराठी संस्कृति को वैश्विक अपील से जोड़ने वाली साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जिसे बड़े पर्दे के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व करने की ज़िम्मेदारी वे समझते हैं, और फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों में फिर से रिलीज़ होगी। (IANS)
कौन हैं अनुराग कश्यप
अनुराग कश्यप भारतीय सिनेमा के सबसे बेबाक फिल्ममेकरों में गिने जाते हैं। गैंग्स ऑफ वासेपुर, देव डी और ब्लैक फ्राइडे जैसी फिल्मों के लिए मशहूर कश्यप अपने सिनेमा के साथ-साथ इंडस्ट्री के मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए भी जाने जाते हैं। सेंसरशिप से लेकर चयन प्रक्रियाओं तक — कश्यप की टिप्पणियां पहले भी बहस छेड़ चुकी हैं।
