Thu, Oct 22, 2026
🔍 ▶️
बॉलीवुड

91 की उम्र में भी वही अंदाज़: ‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ — जैकी श्रॉफ ने जन्मदिन पर विलेन-लेजेंड को किया सलाम

91 की उम्र में भी वही अंदाज़: 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा' — जैकी श्रॉफ ने जन्मदिन पर विलेन-लेजेंड को किया सलाम

बॉलीवुड के सबसे मशहूर विलेन में शुमार प्रेम चोपड़ा ने 23 सितंबर को अपना 91वां जन्मदिन मनाया। 1935 में लाहौर में जन्मे प्रेम चोपड़ा का नाम सुनते ही फिल्मी पर्दे पर गूंजने वाला उनका अंदाज़ याद आ जाता है — और इस खास मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर उनकी तस्वीर शेयर कर उन्हें सलाम किया।

जैकी श्रॉफ ने प्रेम चोपड़ा की तस्वीर के साथ लिखा, “My respect always!” और बैकग्राउंड में उनके सबसे मशहूर डायलॉग जोड़े — “प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा”, “नंगा नहाएगा क्या, निचोड़ेगा क्या” और “मैं वो बला हूं जो शीशे से पत्थर को तोड़ता है”। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रिब्यूट 23 सितंबर को दिया गया, उसी दिन जब प्रेम चोपड़ा 91 साल के हुए।

लाहौर से मुंबई: डॉक्टर बनने का सपना, हीरो बनने की चाह

प्रेम चोपड़ा का जन्म 23 सितंबर 1935 को लाहौर में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश इंडिया का हिस्सा था। वह बड़े शिमला में हुए और पंजाब यूनिवर्सिटी से उन्होंने बी.ए. की डिग्री हासिल की। पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन प्रेम चोपड़ा की किस्मत फिल्मों में लिखी थी। वह मुंबई हीरो बनने के सपने के साथ आए थे, लेकिन फिल्मी पर्दे पर उन्हें सबसे बड़ी पहचान ‘विलेन’ के किरदारों ने दिलाई। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पर्दे पर उनकी खलनायकी इतनी असरदार थी कि असल जिंदगी में शादी-समारोहों में उन्हें देखकर महिलाएं डर जाती थीं।

प्रेम चोपड़ा ने फिल्मी करियर की शुरुआत 1960 में ‘हम हिंदुस्तानी’ से की थी; उसी साल वह पंजाबी फिल्म ‘चौधरी करनैल सिंह’ में भी नजर आए। शुरुआत में छोटे किरदार मिले, लेकिन उनकी आवाज़, अंदाज़ और स्क्रीन प्रेजेंस ने जल्द ही निर्माताओं का ध्यान खींचा।

‘प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा’ — डायलॉग से इतिहास बनाने वाला विलेन

प्रेम चोपड़ा को असली पहचान मनोज कुमार की फिल्म ‘उपकार’ (1967) से मिली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा — पांच दशक के करियर में वह 300 से ज्यादा फिल्मों में नजर आए। 1976 की थ्रिलर ‘दो अनजाने’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड मिला, जो उनकी अभिनय-क्षमता की सबसे बड़ी गवाही है।

लेकिन प्रेम चोपड़ा की सबसे बड़ी विरासत उनके डायलॉग हैं। ‘बॉबी’ (1973) का “प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा” आज भी हर फिल्मी प्रशंसक की ज़ुबान पर है। ‘अलीबाबा और 40 चोर’ (1980) का “बादशाहों का अंदाज़ा बहुत कम गलत होता है…”, ‘सौतन’ (1983) का “जिनके घर शीशे के होते हैं, वो बत्ती बुझाकर कपड़े बदलते हैं” और ‘सपूत’ (1996) का “नोटों का मालिक वही होता है, जो उन्हें अपनी जेब में रखता है” — हर डायलॉग उनकी अलग पहचान बन गया। उनके किरदारों की खासियत थी चार्म और खतरनाकपन का मेल: एक पल में शांत दिखने वाला शख्स अगले ही पल खलनायक बन जाता था।

91 की उम्र में भी बेमिसाल: परिवार और सम्मान

फिल्मों के अलावा उन्हें 1998 में प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। उनकी पत्नी उमा हैं और उनकी तीन बेटियां — प्रेरणा, रकिता और पुनीता — हैं। फिल्मी दुनिया से दूर, प्रेम चोपड़ा का परिवार आज भी फिल्मी परिवारों के सबसे सम्मानित घरानों में गिना जाता है।

91वें जन्मदिन पर जैकी श्रॉफ का ट्रिब्यूट इस बात की गवाही है कि प्रेम चोपड़ा सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि बॉलीवुड के एक युग का नाम हैं। “प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा” — यह डायलॉग आने वाली पीढ़ियों तक गूंजता रहेगा। IANS की रिपोर्ट और Radio City की फोटो-गैलरी में उनके आइकॉनिक डायलॉग्स की पूरी झलक देखी जा सकती है।

और पढ़ें

Abdul Razik
Abdul Razik
Editor

Abdul Razik is an entertainment writer at News Zebra, covering Bollywood and the wider entertainment world with a focus on accurate, engaging storytelling.