टीवी शो ‘अनुपमा’ में वनराज शाह का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाने वाले अभिनेता सुधांशु पांडे एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ‘फिल्में ऑडियंस के लिए बनती हैं’, और इसी दौरान उन्होंने बताया कि साउथ सिनेमा बॉलीवुड से क्यों अलग है। एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुधांशु ने दोनों फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के अपने अनुभव के आधार पर यह राय रखी, जिसके बाद उनका यह बयान एंटरटेनमेंट जगत में बहस का विषय बन गया है।
सुधांशु पांडे का यह मानना है कि किसी भी फिल्म की असली परीक्षा बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों के सामने होती है। उनके मुताबिक, फिल्म निर्माताओं को सबसे पहले दर्शकों की पसंद को समझना चाहिए, क्योंकि आखिरी फैसला हमेशा ऑडियंस ही करती है। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री — दोनों में दशकों से काम कर रहे इस अभिनेता की टिप्पणी इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने दोनों जगह काम करने का तरीका करीब से देखा है।
दोनों इंडस्ट्री में काम का लंबा अनुभव
सुधांशु पांडे ने अपने करियर की शुरुआत 90 के दशक में एक सुपरमॉडल के तौर पर की थी। वह भारत के पहले बॉय बैंड ‘ए बैंड ऑफ बॉयज’ का हिस्सा रहे और फिर फिल्मों की दुनिया में आए। अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘खिलाड़ी 420’ से उन्होंने बॉलीवुड डेब्यू किया। इसके बाद वह ‘सिंह इज़ किंग’, ‘सिंघम’ में इंस्पेक्टर राकेश कदम, ‘मर्डर 2’ और ‘दस कहानियां’ जैसी फिल्मों में नजर आए।
हिंदी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने साउथ सिनेमा में भी लंबा काम किया है। अजित कुमार के साथ तमिल फिल्म ‘बिल्ला 2’ में उन्होंने डॉन अब्बासी का किरदार निभाया, और रजनीकांत की ‘2.0’ में भी वह दिखे। इसके अलावा वह ‘मेघामन्न’ और ‘इंद्रजित’ जैसी तमिल फिल्मों का हिस्सा रहे। हॉलीवुड में भी उन्होंने जैकी चैन के साथ फिल्म ‘द मिथ’ में काम किया। अपने एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भाषा चाहे कोई भी हो, आखिर में अच्छी फिल्म बनाने का जुनून ही मायने रखता है, और तमिल सिनेमा में जिस पैशन से काम होता है, उसी से उसमें क्वालिटी आती है।
‘अनुपमा’ से घर-घर पहुंचे वनराज शाह
फिल्मों के अलावा सुधांशु पांडे को सबसे बड़ी पहचान टेलीविजन से मिली। साल 2020 से 2024 तक उन्होंने टीवी शो ‘अनुपमा’ में वनराज शाह का ग्रे-शेड किरदार निभाया और यह शो टीआरपी की रेस में लगातार टॉप पर रहा। अगस्त 2024 में रक्षाबंधन के बाद उन्होंने शो छोड़ दिया, जिससे फैंस को बड़ा झटका लगा था। बाद में उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह फैसला उन्होंने करियर में आगे बढ़ने के लिए लिया था।
अपने 50 से ज्यादा फिल्मों के करियर पर बात करते हुए सुधांशु ने कई मौकों पर कहा है कि टीवी ने उन्हें वह पहचान दी जो फिल्मों में इतने सालों में नहीं मिली थी। ‘अनुपमा’ के बाद से वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहते हैं और अक्सर इंडस्ट्री के मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं।
बॉलीवुड और साउथ सिनेमा पर क्या बोले सुधांशु
ताजा इंटरव्यू में सुधांशु पांडे ने कहा कि फिल्में बनाने वाले अगर दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी लिखें, तो फिल्म के फ्लॉप होने की गुंजाइश कम हो जाती है। उनका कहना है कि साउथ सिनेमा की सफलता का बड़ा कारण यही है कि वहां कहानी और दर्शक — दोनों को सबसे ऊपर रखा जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने बॉलीवुड के हालिया दौर की फिल्मों को लेकर भी इशारों-इशारों में अपनी राय रखी।
गौरतलब है कि सुधांशु पांडे लंबे समय से बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के कामकाजी अंदाज की तुलना करते रहे हैं। उनके मुताबिक, साउथ में फिल्म को एक जुनून की तरह लिया जाता है, जबकि बॉलीवुड में कई बार स्टारडम कहानी पर हावी हो जाता है। उनके इस ताजा बयान को इसी सोच की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान को लेकर फैंस के बीच चर्चा तेज है।
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: सुधांशु पांडे का तमिल सिनेमा पर पुराना इंटरव्यू (सिनेमा एक्सप्रेस) और उनके करियर पर विस्तृत बातचीत।
