मुंबई में 29 सितंबर को शुरू हुए FICCI FRAMES 2026 के उद्घाटन सत्र में टेलीविजन इंडस्ट्री की ओर से दो बड़ी मांगें रखी गईं। केविन वज (JioStar के एंटरटेनमेंट बिजनेस के CEO और FICCI मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कमेटी के चेयरमैन) ने कहा कि लीनियर टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग के नियामकीय बोझ और लागत को कम करने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) की ऑडियंस रेटिंग तुरंत बहाल करने की भी अपील की।
केविन वज ने कहा, “A tangible roadmap is needed to remove the regulatory burden and cost of linear broadcasting, allowing it to evolve alongside digital and giving consumers greater choice in how, where and on which screen they consume content.” यानी लीनियर टीवी को डिजिटल के साथ-साथ आगे बढ़ने के लिए ज्यादा नियामकीय लचीलेपन की जरूरत है, ताकि दर्शकों को यह चुनने की आजादी मिले कि वे कंटेंट कैसे, कहां और किस स्क्रीन पर देखेंगे। उन्होंने कहा कि सेल्फ-रेगुलेशन, मजबूत इंडस्ट्री मानकों के साथ, इस अगले चरण के केंद्र में होना चाहिए।
BARC रेटिंग को लेकर केविन वज ने जोर देकर कहा कि विश्वसनीय और सत्यापनीय ऑडियंस डेटा की कमी से ब्रॉडकास्टर, विज्ञापनदाता और एजेंसियों के बीच अनिश्चितता बढ़ रही है, खासकर त्योहारी सीजन के दौरान। “Reliable measurement is essential for brands to plan campaigns and reach audiences efficiently,” उन्होंने कहा। वज के मुताबिक, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता के दौर में भरोसेमंद ऑडियंस मेजरमेंट इकोसिस्टम को कुशल बनाए रखने और घरेलू आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए जरूरी है।
केविन वज ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के 10+2 विज्ञापन कैप (एडवरटाइजिंग ड्यूरेशन सीमा) हटाने के फैसले का स्वागत किया और इसे लीनियर ब्रॉडकास्टिंग और व्यापक मीडिया परिदृश्य की बदलती वास्तविकताओं को दर्शाने वाले नियामकीय ढांचे की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि टेलीविजन आज भी भारत के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले और किफायती मीडिया प्लेटफॉर्मों में से एक है, और ब्रॉडकास्टिंग व विज्ञापन व्यापक आर्थिक इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभाते हैं।
केविन वज ने क्या-क्या मांगें रखीं?
- नियामकीय बोझ और लागत कम करने का ठोस रोडमैप: लीनियर ब्रॉडकास्टिंग पर नियमों का बोझ और लागत घटाई जाए, ताकि वह डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ कदमताल कर सके।
- BARC रेटिंग तुरंत बहाल: ऑडियंस रेटिंग के प्रकाशन को फिर से शुरू किया जाए, ताकि त्योहारी सीजन में ब्रांड अभियान की योजना बना सकें।
- 10+2 एड कैप हटने पर संतोष: विज्ञापन अवधि की सीमा हटाने को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।
- AI और कॉपीराइट पर स्पष्टता: उन्होंने कहा कि AI प्रोडक्शन और स्टोरीटेलिंग में फैल रहा है, इसलिए कॉपीराइट, सहमति और क्रिएटर्स के उचित मूल्य को लेकर स्पष्टता जरूरी है।
टाइमलाइन: BARC रेटिंग विवाद की पृष्ठभूमि
- 6 मार्च 2026: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने BARC को न्यूज चैनलों की रेटिंग का प्रकाशन रोकने का आदेश दिया; इजरायल-ईरान संघर्ष की सनसनीखेज कवरेज को वजह बताया गया।
- जुलाई 2026 की शुरुआत: मंत्रालय ने रोक को सभी जॉनर तक बढ़ा दिया — जब तक BARC टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 (जो मार्च में लागू हुई) के तहत रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं करता। BARC ने 29 अप्रैल को आवेदन किया और पैनल को 80,000 घरों के लक्ष्य के मुकाबले 70,876 घरों तक बढ़ाया, फिर भी रेटिंग निलंबित रहीं।
- 21 सितंबर 2026: IBDF (इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन) की AGM में ब्रॉडकास्टरों ने BARC रेटिंग की तुरंत बहाली मांगी; MIB और TRAI के विज्ञापन-अवधि कैप हटाने के फैसलों का स्वागत किया।
- 29 सितंबर 2026: मुंबई के ग्रैंड हयात में FICCI FRAMES 2026 (26वां संस्करण) का आगाज — थीम “India’s Media Moment: Creating Value in an Age of Infinite Content”। उद्घाटन सत्र में केविन वज ने दो मांगें रखीं; केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, FICCI अध्यक्ष अनंत गोयनका और FRAMES एम्बेसडर आयुष्मान खुराना भी मौजूद थे।
- 10 सितंबर 2026: TRAI ने 2012 के विज्ञापन-अवधि नियम (12 मिनट प्रति घंटे की सीमा) निरस्त कर दिए — ब्रॉडकास्ट कंपनियों को विज्ञापन समय के प्रबंधन में लचीलापन मिला।
इंडस्ट्री के आंकड़े: टीवी आज कहां खड़ा है
| मेट्रिक | आंकड़ा | वर्ष |
|---|---|---|
| भारतीय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का आकार | ₹2.78 लाख करोड़ | 2025 (9% वृद्धि) |
| डिजिटल सेगमेंट का आकार | ₹1.1 लाख करोड़ से ज्यादा | 2025 |
| लाइव इवेंट सेगमेंट की वृद्धि | 47% | 2025 |
| भारत में कनेक्टेड टीवी (CTV) घर | करीब 6.5 करोड़ | 2026 |
| BARC पैनल का विस्तार | 70,876 घर (लक्ष्य 80,000) | 2026 |
ये आंकड़े केविन वज के भाषण में ही साझा किए गए (Exchange4Media की रिपोर्ट) और CTV से जुड़ा आंकड़ा Broadcast and CableSat की FRAMES 2026 रिपोर्ट में दिया गया है।
इसका मतलब क्या है?
यह खबर असल में दो पुरानी लड़ाइयों को फिर से सामने लाती है। पहली लड़ाई है नियमन की समानता की — पारंपरिक केबल और DTH ऑपरेटर्स का कहना है कि FAST (फ्री एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टीवी) और ऐप-आधारित लीनियर टीवी सेवाएं तेजी से टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन जैसा काम कर रही हैं, लेकिन उन पर लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटर्स वाली जिम्मेदारियां लागू नहीं होतीं। वहीं, टेक कंपनियों, OTT प्लेटफॉर्मों और स्मार्ट-टीवी निर्माताओं का तर्क है कि इंटरनेट-आधारित सेवाएं मूल रूप से अलग हैं और पुराने लाइसेंसिंग नियम उन पर थोपे नहीं जाने चाहिए। दूसरी लड़ाई भरोसेमंद माप की है — BARC रेटिंग विज्ञापन दरों और चैनल प्लेसमेंट का आधार होती हैं; इनके निलंबन से त्योहारी सीजन में करोड़ों के विज्ञापन फैसले अंधेरे में लिए जा रहे हैं। केविन वज की मांगें दिखाती हैं कि इंडस्ट्री अब सरकार से “बोलने” नहीं, बल्कि टाइमलाइन और ठोस कदमों की उम्मीद कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: केविन वज कौन हैं?
जवाब: केविन वज JioStar के एंटरटेनमेंट बिजनेस (TV और डिजिटल) के CEO हैं और FICCI मीडिया एवं एंटरटेनमेंट कमेटी के चेयरमैन हैं। वे भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।
सवाल: BARC रेटिंग क्यों निलंबित की गई थीं?
जवाब: मार्च 2026 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पहले न्यूज चैनलों की रेटिंग के प्रकाशन पर रोक लगाई, फिर जुलाई 2026 में रोक सभी जॉनर तक बढ़ा दी गई। रोक तब तक जारी है, जब तक BARC टेलीविजन रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं कर लेता।
सवाल: FICCI FRAMES 2026 में और क्या हुआ?
जवाब: उद्घाटन सत्र के बाद “The CEO’s Perspective: Reinventing Media for Infinite Content” पैनल हुआ, जिसमें ज़ी के पुनीत गोयनका, प्राइम वीडियो APAC के गौरव गांधी, SPNI के गौरव बनर्जी और NDTV के राहुल कंवल ने हिस्सा लिया।
सवाल: 10+2 विज्ञापन कैप हटने से क्या बदलेगा?
जवाब: इस सीमा के हटने से ब्रॉडकास्ट कंपनियों को विज्ञापन समय के प्रबंधन में ज्यादा लचीलापन मिलेगा, जिससे वे डिजिटल प्लेटफॉर्मों से बेहतर मुकाबला कर सकेंगी।
