मुंबई। विमल इलायची विज्ञापन विवाद में बड़ा मोड़ आ गया है। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने 29 सितंबर को पुष्टि की कि शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ — तीनों अभिनेताओं ने विमल इलायची के विज्ञापन पर भेजे गए शोकॉज़ नोटिस का जवाब दे दिया है। इनमें से दो अभिनेताओं ने अपने पक्ष में सुनवाई की मांग की थी, और दोनों की सुनवाई 28 सितंबर को पूरी हो चुकी है। मुंढे ने कहा कि विभाग अब मामले में आगे की कार्रवाई कर रहा है।
मुंढे ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “उन नोटिसों के बारे में, तीनों की ओर से जवाब आ चुके हैं। दो ने सुनवाई की मांग की थी। उनकी सुनवाई कल पूरी हो गई और हम आगे बढ़ रहे हैं।” विभाग के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद तीनों अभिनेताओं की ओर से लिखित स्पष्टीकरण जमा किए गए थे, जिसके बाद मांगी गई सुनवाई का दौर पूरा हुआ। अब एफडीए इन जवाबों और सुनवाई के आधार पर अगला कदम तय करेगा।
शोकॉज़ नोटिस: शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ पर आरोप क्या हैं
मामले की जड़ अगस्त 2026 की शुरुआत में है, जब महाराष्ट्र एफडीए ने शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को शोकॉज़ नोटिस जारी किए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नोटिस 11 अगस्त का है। विभाग का आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन असल में विमल पान मसाले का सरोगेट विज्ञापन है — यानी इलायची के नाम पर उस उत्पाद का प्रचार, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है।
नोटिस में तीनों अभिनेताओं से कहा गया था कि वे ब्रांड एंडोर्सर के तौर पर अपनी भूमिका स्पष्ट करें और बताएं कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। इसके साथ ही विभाग ने एंडोर्समेंट से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे थे — जैसे अनुबंध, कैंपेन ब्रीफ, भुगतान का विवरण और यह सबूत कि विज्ञापन करने से पहले उन्होंने जरूरी सावधानी (ड्यू-डिलिजेंस) बरती थी।
टाइमलाइन: अगस्त के नोटिस से सितंबर की सुनवाई तक
- अगस्त 2026 (शुरुआत): महाराष्ट्र एफडीए ने शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची विज्ञापन पर शोकॉज़ नोटिस जारी किए। आरोप — विमल पान मसाले का सरोगेट विज्ञापन।
- 28 सितंबर 2026: जिन दो अभिनेताओं ने सुनवाई की मांग की थी, उनकी सुनवाई पूरी हुई।
- 29 सितंबर 2026: एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने एएनआई को बताया कि तीनों अभिनेताओं के जवाब मिल चुके हैं और विभाग आगे की कार्रवाई कर रहा है।
- 2 अक्टूबर 2026: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एफडीए की कार्यवाही जारी है और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।
कानून की नज़र में: धारा 24 और 53 क्या कहते हैं
एफडीए ने अपनी कार्रवाई का आधार खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (एफएसएस एक्ट) बनाया है। विभाग का कहना है कि इस कानून के तहत सेलिब्रिटी एंडोर्सर केवल निर्माता या विज्ञापनदाता पर दोष डालकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते — विज्ञापन के दावे नियमों के अनुरूप हों, यह सुनिश्चित करना एंडोर्सर का भी दायित्व है।
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| एफएसएस एक्ट की धारा 24 | भ्रामक और छलावे वाले खाद्य विज्ञापनों पर प्रतिबंध |
| एफएसएस एक्ट की धारा 53 | ऐसा विज्ञापन प्रकाशित करने में शामिल लोगों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना |
| अभिनेता | नोटिस का जवाब | सुनवाई |
|---|---|---|
| शाहरुख़ ख़ान | जमा कर दिया | — |
| अजय देवगन | जमा कर दिया | — |
| टाइगर श्रॉफ | जमा कर दिया | — |
नोट: एफडीए कमिश्नर ने यह नहीं बताया कि किन दो अभिनेताओं ने सुनवाई की मांग की थी।
इसका मतलब क्या है?
यह मामला सिर्फ एक विज्ञापन तक सीमित नहीं है — यह उस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि बड़े ब्रांडों का प्रचार करने वाले सितारे भी कानून की नज़र में जवाबदेह हैं। एफडीए का रुख स्पष्ट है: एंडोर्सर को यह दिखाना होगा कि उन्होंने विज्ञापन से जुड़ने से पहले जरूरी जांच-पड़ताल की थी और प्रचारित दावे नियमों के दायरे में हैं। विभाग ने तीनों अभिनेताओं से अनुबंध और भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी मांगे थे, ताकि एंडोर्सर की भूमिका की पूरी तस्वीर सामने आ सके। अब सबकी नज़र एफडीए के अगले कदम पर है — जवाबों और सुनवाई के बाद विभाग क्या निष्कर्ष निकालता है, यही इस विवाद की दिशा तय करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: विमल इलायची विवाद क्या है?
जवाब: महाराष्ट्र एफडीए का आरोप है कि विमल इलायची का विज्ञापन असल में प्रतिबंधित विमल पान मसाले का सरोगेट विज्ञापन है, जिसमें शाहरुख़ ख़ान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ नजर आए थे।
सवाल: तीनों अभिनेताओं ने नोटिस पर क्या किया?
जवाब: एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के अनुसार तीनों ने शोकॉज़ नोटिस का जवाब दे दिया है। दो ने सुनवाई की मांग की थी, जो 28 सितंबर को पूरी हो गई।
सवाल: अब आगे क्या होगा?
जवाब: एफडीए का कहना है कि वह मामले में आगे बढ़ रहा है। अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया गया है।
सवाल: दोषी पाए जाने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
जवाब: एफएसएस एक्ट की धारा 53 के तहत ऐसा विज्ञापन प्रकाशित करने में शामिल लोगों पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस विवाद की विस्तृत रिपोर्ट बॉलीवुड हंगामा में पढ़ी जा सकती है। खाद्य विज्ञापनों से जुड़े नियम खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत तय होते हैं।

