सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 7 अक्टूबर, 2026 को सभी निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों को एक सलाह जारी की है, जिसके तहत उन्हें संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही की फुटेज या संसद टीवी द्वारा निर्मित या उपलब्ध कराई गई किसी भी कार्यक्रम-सामग्री का उपयोग करते समय स्क्रीन पर साफ-साफ “Courtesy: Sansad TV” दिखाना होगा। मंत्रालय ने कहा है कि निजी चैनल संसद टीवी की कार्यवाही और कार्यक्रमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल तो कर रहे हैं, लेकिन फुटेज के स्रोत का उल्लेख लगातार नहीं किया जा रहा था — इसी असंगति को दूर करने के लिए यह समान श्रेय-प्रथा (uniform attribution) लाई गई है।
यह सलाह केवल सूचना नहीं, बल्कि साफ दिशा-निर्देश है: संसद की फुटेज को टेलीकास्ट करना, फिर से दिखाना, साझा करना या अपने कार्यक्रम में शामिल करना — हर स्थिति में दर्शकों को पता होना चाहिए कि मूल फुटेज संसद टीवी की है। मंत्रालय का कहना है कि एक समान क्रेडिट से टीवी प्लेटफॉर्मों पर संसदीय फुटेज और कार्यक्रमों के स्रोत को लेकर ज्यादा स्पष्टता आएगी और दर्शक मूल संसदीय फीड तथा निजी चैनलों की बाद की एडिटोरियल प्रस्तुति के बीच अंतर समझ सकेंगे।
सलाह में क्या-क्या कहा गया है
सलाह के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को लोकसभा या राज्यसभा, किसी भी सदन की कार्यवाही की फुटेज पर “Courtesy: Sansad TV” प्रमुखता से दिखाना होगा।
- सिर्फ सीधी या रिकॉर्डेड कार्यवाही ही नहीं, बल्कि संसद टीवी द्वारा निर्मित या उपलब्ध कराए गए चर्चाएं, इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री और अन्य करंट अफेयर्स कार्यक्रम भी इसके दायरे में हैं।
- यह सलाह सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से जारी की गई है और केबल टेलीविजन (संशोधन) नियम, 2021 के तहत पंजीकृत टीवी चैनलों के स्व-नियामक निकायों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के संघों-संस्थाओं, ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल और मंत्रालय की वेबसाइट तक प्रसारित की गई है।
- इस संचार में गैर-अनुपालन पर कोई नई सजा या प्रवर्तन तंत्र तय नहीं किया गया है, न ही “Courtesy: Sansad TV” कैप्शन की अवधि, आकार या स्थान को लेकर कोई खास निर्देश है — सिर्फ “प्रमुखता से” दिखाने की शर्त है।
- सलाह से संसद की टेलीविजन कवरेज की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है; यह सिर्फ संसद टीवी की सामग्री के श्रेय को लेकर है।
संसद टीवी क्या है: एक परिचय
यह भारत का संसदीय चैनल है, जो लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही का सीधा और प्राथमिक टेलीविजन कवरेज देता है। इसके अलावा यह संसद और समसामयिक मामलों से जुड़े कार्यक्रम, चर्चाएं, इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री और अन्य सामग्री का निर्माण भी करता है। इसकी स्थापना 2021 में लोकसभा टेलीविजन (LSTV) और राज्यसभा टेलीविजन (RSTV) के विलय से हुई थी।
आज के समय में संसदीय कार्यवाही टेलीविजन न्यूज नेटवर्कों और अन्य ब्रॉडकास्ट प्लेटफॉर्मों पर नियमित रूप से दिखाई जाती है। ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक कवरेज और करंट अफेयर्स कार्यक्रमों के लिए प्रसारक अक्सर प्राथमिक फीड की फुटेज का इस्तेमाल करते हैं। मंत्रालय ने देखा कि ऐसी कार्यवाही और कार्यक्रम “बड़े पैमाने पर इस्तेमाल, पुनः प्रकाशित, उद्धृत और सम्मिलित” किए जाते हैं, लेकिन स्रोत का उल्लेख लगातार नहीं होता था।
टाइमलाइन
- 2021: लोकसभा टेलीविजन और राज्यसभा टेलीविजन के विलय से संसद टीवी का गठन।
- 17 जून, 2021: केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 की अधिसूचना — प्रसारकों की तीन-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था बनी।
- 28 मई, 2023: नए संसद भवन का उद्घाटन; लोकसभा कक्ष की बैठने की क्षमता लगभग 888 और राज्यसभा कक्ष की लगभग 384।
- 19 सितंबर, 2023: नए संसद भवन में पहला विशेष सत्र आयोजित।
- 7 अक्टूबर, 2026: सूचना प्रसारण मंत्रालय ने “Courtesy: Sansad TV” श्रेय देने की सलाह जारी की।
इसका मतलब क्या है?
मंत्रालय का यह कदम फुटेज के इस्तेमाल पर पाबंदी नहीं है — निजी चैनल संसदीय कार्यवाही और संसद टीवी के कार्यक्रम पहले की तरह ही दिखा सकते हैं। बदलाव सिर्फ इतना है कि दर्शक को यह स्पष्ट रूप से पता चलना चाहिए कि फुटेज मूल रूप से संसद टीवी की है। इससे खबरों की विश्वसनीयता बढ़ती है, क्योंकि दर्शक यह समझ पाते हैं कि वह संसद की प्राथमिक फीड देख रहा है, न कि चैनल की अपनी एडिट की हुई प्रस्तुति। प्रसारकों के लिए यह एक सरल अनुशासन है: सामग्री वहीं से आई है, उसका नाम भी वहीं लिखा जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या निजी चैनलों को संसद की फुटेज दिखाने पर रोक लगी है?
नहीं। सलाह में फुटेज के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है — सिर्फ स्रोत का श्रेय देने का निर्देश है।
क्रेडिट कैसे दिखाना होगा?
संसद टीवी की फुटेज या सामग्री का उपयोग, पुनः प्रकाशन, साझा या सम्मिलन करते समय “Courtesy: Sansad TV” कैप्शन प्रमुखता से दिखाना होगा।
यह सलाह कब जारी हुई?
सलाह 7 अक्टूबर, 2026 को जारी हुई और सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन से दी गई है।
क्या इसमें दंड का प्रावधान है?
सूत्रों के मुताबिक इस संचार में गैर-अनुपालन के लिए कोई नई सजा या प्रवर्तन तंत्र तय नहीं किया गया है।
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इस विषय पर विस्तार से पढ़ें: exchange4media की रिपोर्ट और संसद टीवी की आधिकारिक वेबसाइट।

